हिन्दी गौरव-- गान
हिन्दी भाषा हिन्द
की आन है,सम्मान है।
विश्व भाषा ये बने,
बस यही अरमान है।।
हिन्दी गौरव गान तो
हिन्द जन गायें सदा,
ज्ञान-गंगा हिन्द की
बहती ही जाये सदा ।
सदियों की ये साधना,वर्षो
का संधान है।।
सुन्दर मधुरिम तान
ये, मीरा के सुर सुनो,
सूर,तुलसी,जायसी की
प्रेम-रचना धुन सुनो।
कवियों की वाणी में
मानों, मां का ये वरदान है।।
मात्र ये भाषा नही,
मित्रों इतना जान लें,
राष्ट्र-गौरव हम सभी
का आओ इसको मान लें।
हिन्दी अपनी धड़कनें,अपना
तो मन-प्रान है।।
कितना भी बदले जमाना,
लाख हम जायें बदल,
हिन्दी के प्रसार की
हम करें हरदम पहल।
राष्ट्रभाषा से ही
होती, राष्ट्र की पहचान है।।
v हर्ष सिन्धु सिंह
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