गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

भ्रष्टाचार

जैसे ही हम भ्रष्टाचार शब्द सुनते हैं हमारे जेहन में किसी दूसरे व्यक्ति ख्याल आता है। एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर सामने  है जिसने  किसी न किसी प्रकार  का भ्रष्टाचार किया हो ,यह कितने आश्चर्य  की  बात है की हम एक बार भी यह नहीं सोचते हैं कि किसी न किसी तरह से हम खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं। 
                
                            आज समाज में तरह तरह की विसंगतियां व्याप्त हो गयी  हैं  जिसका परिणाम यह हो रहा है कि हम उन्हें अपने जीवन का एक भाग मानकर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं।  अब समय आ गया है कि अपनी सोई हुयी आत्मा को जगाएं और स्वयं तथा अपने समाज की दुर्दशा होने  से बचा लें। देश किसी एक का नहीं है सभी की सामूहिक जिम्मेदारी तय  होनी चाहिए। भ्रस्टाचार के जड़ में कौन मठ्ठा डालेगा  यह कोई नहीं जनता है।  जब सभी चाहते  हैं की यह रोग जड़ से मिठे तो फिर क्या कारन है क़ि यह घटने के बजाये बढ़ता ही जा  है।  

शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

हिन्दी गौरव-- गान

  
हिन्दी गौरव-- गान
               हिन्दी भाषा हिन्द की आन है,सम्मान है।                 
                विश्व भाषा ये बने, बस यही अरमान है।।                   
               हिन्दी गौरव गान तो हिन्द जन गायें सदा,                 
             ज्ञान-गंगा हिन्द की बहती ही जाये सदा ।                
                सदियों की ये साधना,वर्षो का संधान है।।                   
             सुन्दर मधुरिम तान ये, मीरा के सुर सुनो,               
              सूर,तुलसी,जायसी की प्रेम-रचना धुन सुनो।                 
                कवियों की वाणी में मानों, मां का ये वरदान है।।               
            मात्र ये भाषा नही, मित्रों इतना जान लें,                
            राष्ट्र-गौरव हम सभी का इसको मान लें।            
हिन्दी अपनी धड़कनें,अपना तो मन-प्रान है।।
कितना भी बदले जमाना, लाख हम जायें बदल,
हिन्दी के प्रसार की हम करें हरदम पहल।
राष्ट्रभाषा से ही होती, राष्ट्र की पहचान है।।
v  हर्ष सिन्धु सिंह